परिचय
उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र लंबे समय से पानी की कमी और सूखे की समस्या से जूझता रहा है। यहाँ का अधिकांश हिस्सा पठारी क्षेत्र है, जहाँ सामान्य बोरिंग कराने पर पानी नहीं मिलता। किसान बरसात पर निर्भर रहते हैं और गर्मियों में स्थिति और भी विकट हो जाती है। फसलें सूख जाती हैं, पशुओं के लिए चारा और पानी की कमी हो जाती है।
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने ब्लास्ट कूप निर्माण योजना की शुरुआत की है। इस योजना के तहत उन क्षेत्रों में विशेष तकनीक से बड़े आकार के कूप बनाए जाएंगे, जहाँ बोरिंग से पानी नहीं मिलता। ब्लास्ट कूप के माध्यम से भूमिगत पानी का भंडारण सुनिश्चित होगा और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो सकेगा।

योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य उद्देश्य है—
- सिंचाई क्षमता में वृद्धि करना – ताकि किसान वर्ष भर फसल उगा सकें।
- ग्रीष्म ऋतु में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना – न सिर्फ सिंचाई बल्कि पीने और अन्य आवश्यकताओं के लिए भी।
- किसान की आय बढ़ाना – फसल उत्पादन बढ़ेगा तो किसानों की आय भी दोगुनी होगी।
- रोजगार सृजन – कृषि कार्यों में मजदूरी और अन्य रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- गरीबी उन्मूलन – गरीब, लघु और सीमांत किसानों को सिंचाई सुविधा देकर उनके जीवन स्तर में सुधार।
ब्लास्ट कूप निर्माण का स्वरूप
- व्यास – 06 मीटर
- गहराई – 12 मीटर
- क्षमता – लगभग 1.0 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई।
- साथ में – 8 HP का डीज़ल पम्पसेट और HDPE पाइपलाइन (90mm/110mm, लंबाई 180 मीटर तक)।
यह कूप सामान्य कुओं से कहीं बड़ा होता है और इसकी संरचना ऐसी होती है कि पानी लंबे समय तक उपलब्ध रहता है।

योजना का लाभ क्षेत्र
यह योजना मुख्य रूप से बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र के पठारी इलाकों में लागू होगी। इनमें शामिल जिले हैं –
- बुन्देलखण्ड क्षेत्र – झाँसी, ललितपुर, महोबा, चित्रकूट
- विन्ध्य क्षेत्र – मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज, चन्दौली
लक्ष्य निर्धारण और वित्तीय व्यवस्था
- हर साल जनपदवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।
- लक्ष्य उपलब्ध धनराशि के आधार पर बदल सकते हैं।
- योजना में सरकार द्वारा अधिकतम 90% तक का अनुदान दिया जाएगा।
- किसान अंश केवल 10% रहेगा।
- सर्वेक्षण शुल्क – ₹1500 (बैंक ड्राफ्ट/चालान के रूप में)।
- पंजीकरण – विभागीय पोर्टल (jjmup.org) पर अनिवार्य।
लाभार्थी चयन प्रक्रिया
लाभार्थी चयन पारदर्शी प्रक्रिया से किया जाएगा:
- सर्वेक्षण और स्थल चयन – केवल उन्हीं जगहों का चयन होगा जहाँ भूगर्भीय रिपोर्ट ब्लास्ट कूप निर्माण के लिए उपयुक्त होगी। एल्यूवियल (बालू/दोमट) क्षेत्रों में चयन नहीं होगा।
- सूची तैयार करना – उपयुक्त स्थलों की सूची अधिशासी अभियंता द्वारा विभागाध्यक्ष को भेजी जाएगी।
- प्रथम आवक प्रथम पावक – जो किसान पहले आवेदन करेंगे और सर्वेक्षण शुल्क जमा करेंगे, उनकी प्राथमिकता होगी।
- पंजीकरण – लाभार्थी का विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य।
- सार्वजनिक प्रदर्शन – चयनित किसानों की सूची ग्राम पंचायत/ब्लॉक/जिला स्तर पर सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शित की जाएगी।
- पात्रता शर्तें –
- किसान कृषि कार्य से जुड़ा हो।
- पहले कभी ब्लास्ट कूप पर अनुदान न लिया हो।
- सर्वेक्षण शुल्क (₹1500) जमा किया हो।
ब्लास्ट कूप निर्माण की विस्तृत प्रक्रिया
1. सर्वेक्षण कार्य
- लघु सिंचाई विभाग, भूगर्भ जल विभाग और रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर की मदद से विस्तृत सर्वेक्षण करेगा।
- यदि सरकारी संस्थाएँ समय पर सर्वेक्षण न कर पाएं, तो निजी संस्थाओं से निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराया जाएगा।
2. आवेदन और शुल्क जमा
- किसान को सहायक अभियंता कार्यालय में प्रार्थना पत्र, आवश्यक अभिलेख और ₹1500 शुल्क (ड्राफ्ट/चालान) जमा करना होगा।
- नकद किसी भी हालत में स्वीकार नहीं होगा।
3. स्थल चिन्हांकन और सूची बनाना
- उपयुक्त स्थल मिलने पर अभियंताओं की रिपोर्ट के आधार पर सूची बनाई जाएगी।
- इस सूची को विभागाध्यक्ष से स्वीकृत कराया जाएगा।
4. किसान का योगदान
- किसान को 10% अंश वहन करना होगा।
- शेष 90% खर्च सरकार वहन करेगी।
5. निर्माण कार्य

- ब्लास्ट तकनीक से 6 मीटर व्यास और 15 मीटर गहराई का कूप बनेगा।
- 8 HP का पम्पसेट लगाया जाएगा।
- HDPE पाइपलाइन बिछाई जाएगी।
- लगभग 3 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी।
6. सत्यापन और शपथ पत्र
- निर्माण पूरा होने पर किसान, अभियंता, ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्यों के साथ संयुक्त फोटोग्राफ लिया जाएगा।
- किसान को ₹100 स्टाम्प पेपर पर शपथ पत्र देना होगा कि कूप का उपयोग केवल सिंचाई हेतु किया जाएगा।
प्राथमिकताएँ और प्रतिबंध
- केवल योग्य किसान ही इस योजना का लाभ उठा सकेंगे।
- जिन्होंने पहले कभी ब्लास्ट कूप का अनुदान लिया है, वे पात्र नहीं होंगे।
- अतिरिक्त खर्च किसान स्वयं वहन करेगा।
गुणवत्ता नियंत्रण और भौतिक सत्यापन

- निर्माण कार्य विभागीय नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुसार होगा।
- अभियंता स्थल पर जाकर निरीक्षण करेंगे।
- निर्माण की गुणवत्ता और पानी की उपलब्धता की जांच होगी।
अनुदान स्वीकृति प्रक्रिया
- अनुदान विभागीय नियमों के अनुसार दिया जाएगा।
- किसान को केवल अनुमन्य अनुदान मिलेगा, अधिक नहीं।
- यदि निर्माण पर ज्यादा खर्च आता है तो अतिरिक्त खर्च किसान वहन करेगा।
योजना से किसानों को होने वाले लाभ
- सिंचाई की सुविधा – पानी मिलने से वर्ष भर खेती संभव।
- फसल उत्पादन में वृद्धि – एक सीजन की जगह साल में दो-तीन फसलें।
- आय में बढ़ोतरी – किसान की आमदनी कई गुना होगी।
- पशुपालन और बागवानी को बढ़ावा – पर्याप्त पानी से पशुओं और फलदार पेड़ों की देखभाल संभव।
- रोजगार सृजन – खेतों में मजदूरी के अवसर बढ़ेंगे।
- गरीबी में कमी – छोटे और सीमांत किसानों का जीवन स्तर सुधरेगा।
निष्कर्ष
बुन्देलखण्ड और विन्ध्य क्षेत्र के किसानों के लिए नये ब्लास्ट कूप निर्माण योजना किसी वरदान से कम नहीं है। यह योजना न सिर्फ जल संकट का समाधान करेगी बल्कि किसानों की आय बढ़ाकर उनके जीवन स्तर को भी ऊँचा उठाएगी। सरकार की मंशा है कि हर किसान आत्मनिर्भर बने और पानी की कमी के कारण कभी खेती छोड़ने पर मजबूर न हो।
यदि किसान सही तरीके से आवेदन करें, नियमों का पालन करें और समय पर प्रक्रिया पूरी करें तो निश्चित रूप से उन्हें इस योजना का लाभ मिलेगा।