मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना: उथले नलकूप हेतु पम्पसेट खरीद, स्थापना, अनुदान एवं गुणवत्ता नियंत्रण – सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान कर उनकी कृषि आय बढ़ाने की एक प्रभावी पहल है। इस योजना के अंतर्गत उथले नलकूपों पर पम्पसेट की स्थापना, अनुदान व्यवस्था तथा गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाया गया है।

यह ब्लॉग किसानों, डीलरों और विभागीय अधिकारियों को योजना की सही, स्पष्ट और विश्वसनीय जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।


पम्पसेट खरीद की सुविधा

इस योजना में पम्पसेट खरीदने के लिए बैंक ऋण लेना अनिवार्य नहीं है। किसान अपनी सुविधा अनुसार –

  • नकद भुगतान से
  • या बैंक ऋण के माध्यम से

आईएसआई मार्क विद्युत अथवा डीजल पम्पसेट खरीद सकते हैं।

इससे किसानों को स्वतंत्रता मिलती है और वे अपनी आर्थिक स्थिति के अनुसार निर्णय ले सकते हैं।मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना: उथले नलकूप हेतु पम्पसेट खरीद, स्थापना, अनुदान एवं गुणवत्ता नियंत्रण – सम्पूर्ण मार्गदर्शिका

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना किसानों को सिंचाई सुविधा प्रदान कर उनकी कृषि आय बढ़ाने की एक प्रभावी पहल है। इस योजना के अंतर्गत उथले नलकूपों पर पम्पसेट की स्थापना, अनुदान व्यवस्था तथा गुणवत्ता नियंत्रण की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं किसान हितैषी बनाया गया है।

यह ब्लॉग किसानों, डीलरों और विभागीय अधिकारियों को योजना की सही, स्पष्ट और विश्वसनीय जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।



पम्पसेट डीलर का चयन एवं पंजीकरण

पम्पसेट केवल उन्हीं डीलरों से खरीदे जाएंगे जो –

  • आईएसआई लाइसेंस प्राप्त निर्माता के अधिकृत विक्रेता हों
  • विभाग में पंजीकृत हों
  • ₹50,000 की जमानत राशि जमा कर चुके हों

इन डीलरों की सूची सभी विकास खण्ड कार्यालयों एवं विभागीय नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध कराई जाती है।

किसान अपनी आवश्यकता और स्थल की स्थिति के अनुसार पंजीकृत डीलर से पम्पसेट खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।


पम्पसेट क्षमता की सीमा

अनुदान केवल निम्न क्षमता के पम्पसेट पर ही अनुमन्य है –

  • विद्युत पम्पसेट: 3 HP से 10 HP
  • डीजल पम्पसेट: 5 HP से 10 HP

इससे कम या अधिक क्षमता वाले पम्पसेट पर अनुदान नहीं दिया जाएगा।


पम्पसेट खरीद पर अनुदान की प्रक्रिया

पम्पसेट खरीद पर अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है –

  1. किसान अनुदान हेतु आवेदन करेगा
  2. विभागीय तकनीकी अधिकारी संस्तुति करेंगे
  3. सहायक अभियन्ता द्वारा स्वीकृति दी जाएगी
  4. किसान पंजीकृत डीलर से नकद पम्पसेट खरीदेगा
  5. स्थल पर पम्पसेट की स्थापना एवं ट्रायल होगा
  6. संयुक्त सत्यापन रिपोर्ट तैयार होगी
  7. अनुदान राशि सीधे किसान या डीलर के बैंक खाते में भेजी जाएगी

ध्यान रहे कि अग्रिम अनुदान नहीं दिया जाएगा और पुराने पम्पसेट पर कोई अनुदान देय नहीं होगा।


बोरिंग के बाद पम्पसेट लेने की सुविधा

यदि कोई किसान बोरिंग के कुछ समय बाद पम्पसेट की आवश्यकता महसूस करता है, तो वह उसी वित्तीय वर्ष में पम्पसेट खरीद कर अनुदान का लाभ ले सकता है।

यह व्यवस्था किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।


सत्यापन व्यवस्था

योजना में सत्यापन की बहु-स्तरीय प्रणाली लागू है –

  • अवर अभियन्ता द्वारा 100% सत्यापन
  • सहायक अभियन्ता द्वारा 20%
  • अधिशासी अभियन्ता द्वारा 10%
  • अधीक्षण अभियन्ता द्वारा 5%

इससे योजना में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहती है।


ऋण के माध्यम से पम्पसेट स्थापना

जो किसान बैंक ऋण के माध्यम से पम्पसेट खरीदते हैं, उनके लिए –

  • विभाग तकनीकी प्लान बनाकर बैंक को भेजता है
  • बैंक ऋण स्वीकृत करता है
  • अनुदान राशि बैंक को अग्रिम उपलब्ध कराई जाती है
  • बैंक मासिक समायोजन रिपोर्ट विभाग को भेजता है

ऋण पूर्ण होने तक पम्पसेट बन्धक रहेगा और किसान उसे बेच नहीं सकता।

यदि दो माह के भीतर पम्पसेट स्थापित नहीं किया गया तो बैंक द्वारा नियमानुसार वसूली की जाएगी।


अनुदान दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई

यदि अनुदान के दुरुपयोग का मामला सामने आता है तो –

  • बैंक अनुदान राशि की वसूली करेगा
  • जिला प्रशासन को सूचना दी जाएगी
  • संबंधित अधिकारी/कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी

सरकार इस विषय को अत्यन्त गंभीरता से लेती है।


पीवीसी पाइप की गुणवत्ता नियंत्रण

बोरिंग में उपयोग होने वाले पीवीसी पाइप पर अनिवार्य रूप से होना चाहिए –

  • ISI मार्क
  • लाइसेंस नंबर
  • बैच नंबर
  • हर 3 मीटर पर ISI मार्किंग

सभी अधिकारियों द्वारा भुगतान से पहले इसकी पुष्टि की जाती है।


पाइप सैंपल परीक्षण

0.25 प्रतिशत मामलों में पीवीसी पाइप के सैंपल लेकर परीक्षण हेतु CIPET भेजे जाते हैं।
सैंपल दो टुकड़ों में, अलग-अलग पाइप से और ISI मार्क वाले भाग से लिया जाता है।


सैंपल फेल होने पर कार्रवाई

यदि पाइप सैंपल फेल पाया गया –

  • ₹50,000 की जमानत राशि जब्त
  • डीलर को कम से कम 3 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट
  • भविष्य में विभागीय खरीद पर प्रतिबंध

यह व्यवस्था किसानों को घटिया सामग्री से बचाने के लिए की गई है।


पारदर्शिता और ऑनलाइन निगरानी

पूरी हुई प्रत्येक बोरिंग का विवरण jjmup.org पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिसे आम जनता देख सकती है। इससे योजना पूरी तरह पारदर्शी बनती है।


क्षेत्रीय अनुश्रवण

योजना की गति बनाए रखने के लिए –

  • ग्राम स्तर
  • जिला पंचायत स्तर
  • विभागीय स्तर

पर नियमित निरीक्षण और समीक्षा की जाती है।


सामान्य निर्देश

  • प्रत्येक ब्लॉक का मॉडल प्राक्कलन तैयार होगा
  • नियम ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित होंगे
  • चयन प्रक्रिया प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी
  • योजना का तकनीकी नियंत्रण अभियन्ताओं के पास रहेगा

प्रगति रिपोर्ट

हर पखवाड़े और हर माह –

  • वित्तीय प्रगति
  • भौतिक प्रगति
  • गुणवत्ता रिपोर्ट

पोर्टल पर अपलोड की जाती है।


निष्कर्ष

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना किसानों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उनकी खेती को मजबूत बनाने का एक भरोसेमंद माध्यम है। यह योजना –

  • सिंचाई सुरक्षा देती है
  • जल संरक्षण बढ़ाती है
  • उत्पादन और आय में वृद्धि करती है
  • किसानों को आत्मनिर्भर बनाती है

सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक पात्र किसान तक यह सुविधा पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पहुंचे।


पम्पसेट डीलर का चयन एवं पंजीकरण

पम्पसेट केवल उन्हीं डीलरों से खरीदे जाएंगे जो –

  • आईएसआई लाइसेंस प्राप्त निर्माता के अधिकृत विक्रेता हों
  • विभाग में पंजीकृत हों
  • ₹50,000 की जमानत राशि जमा कर चुके हों

इन डीलरों की सूची सभी विकास खण्ड कार्यालयों एवं विभागीय नोटिस बोर्ड पर उपलब्ध कराई जाती है।

किसान अपनी आवश्यकता और स्थल की स्थिति के अनुसार पंजीकृत डीलर से पम्पसेट खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं।


पम्पसेट क्षमता की सीमा

अनुदान केवल निम्न क्षमता के पम्पसेट पर ही अनुमन्य है –

  • विद्युत पम्पसेट: 3 HP से 10 HP
  • डीजल पम्पसेट: 5 HP से 10 HP

इससे कम या अधिक क्षमता वाले पम्पसेट पर अनुदान नहीं दिया जाएगा।


पम्पसेट खरीद पर अनुदान की प्रक्रिया

पम्पसेट खरीद पर अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है –

  1. किसान अनुदान हेतु आवेदन करेगा
  2. विभागीय तकनीकी अधिकारी संस्तुति करेंगे
  3. सहायक अभियन्ता द्वारा स्वीकृति दी जाएगी
  4. किसान पंजीकृत डीलर से नकद पम्पसेट खरीदेगा
  5. स्थल पर पम्पसेट की स्थापना एवं ट्रायल होगा
  6. संयुक्त सत्यापन रिपोर्ट तैयार होगी
  7. अनुदान राशि सीधे किसान या डीलर के बैंक खाते में भेजी जाएगी

ध्यान रहे कि अग्रिम अनुदान नहीं दिया जाएगा और पुराने पम्पसेट पर कोई अनुदान देय नहीं होगा।


बोरिंग के बाद पम्पसेट लेने की सुविधा

यदि कोई किसान बोरिंग के कुछ समय बाद पम्पसेट की आवश्यकता महसूस करता है, तो वह उसी वित्तीय वर्ष में पम्पसेट खरीद कर अनुदान का लाभ ले सकता है।

यह व्यवस्था किसानों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है।


सत्यापन व्यवस्था

योजना में सत्यापन की बहु-स्तरीय प्रणाली लागू है –

  • अवर अभियन्ता द्वारा 100% सत्यापन
  • सहायक अभियन्ता द्वारा 20%
  • अधिशासी अभियन्ता द्वारा 10%
  • अधीक्षण अभियन्ता द्वारा 5%

इससे योजना में पूर्ण पारदर्शिता बनी रहती है।


ऋण के माध्यम से पम्पसेट स्थापना

जो किसान बैंक ऋण के माध्यम से पम्पसेट खरीदते हैं, उनके लिए –

  • विभाग तकनीकी प्लान बनाकर बैंक को भेजता है
  • बैंक ऋण स्वीकृत करता है
  • अनुदान राशि बैंक को अग्रिम उपलब्ध कराई जाती है
  • बैंक मासिक समायोजन रिपोर्ट विभाग को भेजता है

ऋण पूर्ण होने तक पम्पसेट बन्धक रहेगा और किसान उसे बेच नहीं सकता।

यदि दो माह के भीतर पम्पसेट स्थापित नहीं किया गया तो बैंक द्वारा नियमानुसार वसूली की जाएगी।


अनुदान दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई

यदि अनुदान के दुरुपयोग का मामला सामने आता है तो –

  • बैंक अनुदान राशि की वसूली करेगा
  • जिला प्रशासन को सूचना दी जाएगी
  • संबंधित अधिकारी/कर्मचारी पर अनुशासनात्मक कार्यवाही होगी

सरकार इस विषय को अत्यन्त गंभीरता से लेती है।


पीवीसी पाइप की गुणवत्ता नियंत्रण

बोरिंग में उपयोग होने वाले पीवीसी पाइप पर अनिवार्य रूप से होना चाहिए –

  • ISI मार्क
  • लाइसेंस नंबर
  • बैच नंबर
  • हर 3 मीटर पर ISI मार्किंग

सभी अधिकारियों द्वारा भुगतान से पहले इसकी पुष्टि की जाती है।


पाइप सैंपल परीक्षण

0.25 प्रतिशत मामलों में पीवीसी पाइप के सैंपल लेकर परीक्षण हेतु CIPET भेजे जाते हैं।
सैंपल दो टुकड़ों में, अलग-अलग पाइप से और ISI मार्क वाले भाग से लिया जाता है।


सैंपल फेल होने पर कार्रवाई

यदि पाइप सैंपल फेल पाया गया –

  • ₹50,000 की जमानत राशि जब्त
  • डीलर को कम से कम 3 वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट
  • भविष्य में विभागीय खरीद पर प्रतिबंध

यह व्यवस्था किसानों को घटिया सामग्री से बचाने के लिए की गई है।


पारदर्शिता और ऑनलाइन निगरानी

पूरी हुई प्रत्येक बोरिंग का विवरण jjmup.org पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिसे आम जनता देख सकती है। इससे योजना पूरी तरह पारदर्शी बनती है।


क्षेत्रीय अनुश्रवण

योजना की गति बनाए रखने के लिए –

  • ग्राम स्तर
  • जिला पंचायत स्तर
  • विभागीय स्तर

पर नियमित निरीक्षण और समीक्षा की जाती है।


सामान्य निर्देश

  • प्रत्येक ब्लॉक का मॉडल प्राक्कलन तैयार होगा
  • नियम ग्राम पंचायतों में प्रदर्शित होंगे
  • चयन प्रक्रिया प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी
  • योजना का तकनीकी नियंत्रण अभियन्ताओं के पास रहेगा

प्रगति रिपोर्ट

हर पखवाड़े और हर माह –

  • वित्तीय प्रगति
  • भौतिक प्रगति
  • गुणवत्ता रिपोर्ट

पोर्टल पर अपलोड की जाती है।


निष्कर्ष

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना किसानों के लिए केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि उनकी खेती को मजबूत बनाने का एक भरोसेमंद माध्यम है। यह योजना –

  • सिंचाई सुरक्षा देती है
  • जल संरक्षण बढ़ाती है
  • उत्पादन और आय में वृद्धि करती है
  • किसानों को आत्मनिर्भर बनाती है

सरकार का उद्देश्य है कि प्रत्येक पात्र किसान तक यह सुविधा पूरी पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ पहुंचे।

Share this

Join us in creating a water-secure and eco-friendly future.

Visit Us

Copyright © 2025Savewatersavenature. All rights reserved.

Scroll to Top