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Medium Tube well

मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना (मध्यम गहरे नलकूप) – सम्पूर्ण जानकारी भारत जैसे कृषि प्रधान देश में सिंचाई की सुविधा किसानों के लिए जीवनरेखा से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की सिंचाई समस्याओं को ध्यान में रखते हुए “मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना (मध्यम गहरे नलकूप)” लागू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है, जहाँ उथले नलकूपों का निर्माण कठिन है और जलस्तर अपेक्षाकृत गहरा है। आइए, इस योजना को चरणबद्ध और विस्तार से समझते हैं— 1. योजना का परिचय इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 31 से 60 मीटर गहराई वाले जलग्राही क्षेत्रों में मध्यम गहरे नलकूपों का निर्माण कराया जाएगा। 2. योजना का उद्देश्य 3. कृषक-लाभार्थी की पात्रता (a) सभी वर्ग के किसान पात्र होंगे।(b) जो किसान पहले ही मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना के अंतर्गत उथले या गहरे नलकूप का लाभ ले चुके हैं, वे तभी पात्र होंगे जब— 4. कार्यक्षेत्र और मानक 5. योजना की लागत और अनुदान 6. नलकूप निर्माण की प्रक्रिया 6. विद्युतीकरण की प्रक्रिया 7. बोरिंग असफल होने की स्थिति 8. सामग्री क्रय और आपूर्ति 9. अनुश्रवण और पर्यवेक्षण 10. वार्षिक लक्ष्य और बजट 11. विशेष प्रावधान निष्कर्ष “मुख्यमंत्री लघु सिंचाई योजना (मध्यम गहरे नलकूप)” किसानों के लिए एक बड़ी राहत है।यह योजना— इस योजना से न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि प्रदेश के कृषि क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

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इसके अन्तर्गत प्रदेश के एल्यूवियल क्षेत्रों में 30 मीटर गहराई तक की 110 एम०एम० (04 इंच) व्यास की बोरिंग करायी जायेगी। उथले नलकूप से सृजित सिंचन क्षमता का मानक प्रति नलकूप 05 हेक्टेयर है। savewatersavenature.com
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उथले नलकूप: ग्रामीण भारत की सिंचाई व्यवस्था का अहम आधार ✨ परिचय भारत कृषि प्रधान देश है और यहाँ की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर करती है। सिंचाई के साधनों में नलकूप (Tube Well) का विशेष महत्व है। नलकूप दो प्रकार के होते हैं – उथले नलकूप (Shallow Tube Well) और गहरे नलकूप (Deep Tube Well)। इन दोनों में से उथला नलकूप अपेक्षाकृत कम गहराई वाला और ग्रामीण इलाकों के लिए किफायती विकल्प माना जाता है। उथले नलकूप का मुख्य उद्देश्य सतही जलभृत (Shallow Aquifer) से भूजल निकालना होता है। सामान्यतः इनकी गहराई 30 मीटर तक होती है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का सस्ता और सरल साधन है। 🔎 उथले नलकूप की परिभाषा उथला नलकूप वह कृत्रिम संरचना है, जिसमें एक बोरहोल जमीन में खोदा जाता है ताकि सतही जलभृत से भूजल निकाला जा सके। इनका निर्माण साधारण मशीनरी या हाथ से संचालित उपकरणों द्वारा किया जाता है।गुहा ट्यूबवेल (Cavity Tube Well) 📌 गुहा ट्यूबवेल (Cavity Tube Well) गुहा ट्यूबवेल वह नलकूप है जिसमें जलभृत (Aquifer) की मिट्टी या रेतीली परत को बोरहोल के माध्यम से बाहर निकालकर नीचे एक खोखला स्थान (Cavity) बना दिया जाता है। यही खोखला स्थान जल संग्रहण और छनन (filtration) का कार्य करता है। 🛠️ निर्माण प्रक्रिया ⚙️ संचालन ✅ विशेषताएँ ❌ सीमाएँ 2️⃣ छलनी ट्यूबवेल (Strainer Tube Well) 📌 परिभाषा छलनी ट्यूबवेल वह नलकूप है जिसमें पानी छानकर लाने के लिए छिद्रदार पाइप (Strainer Pipe) का उपयोग किया जाता है। ये पाइप विशेष प्रकार की छलनी (filter) से बने होते हैं जो मिट्टी को बाहर रोकते हैं और केवल पानी को अंदर आने देते हैं। 🛠️ निर्माण प्रक्रिया ⚙️ संचालन ✅ विशेषताएँ ❌ सीमाएँ 📊 तुलना (गुहा बनाम छलनी ट्यूबवेल) बिंदु गुहा ट्यूबवेल (Cavity) छलनी ट्यूबवेल (Strainer) निर्माण लागत कम अधिक जीवनकाल 5–7 वर्ष 10–15 वर्ष पानी की गुणवत्ता गादयुक्त हो सकता है अपेक्षाकृत साफ रखरखाव बार-बार सफाई ज़रूरी कम रखरखाव की ज़रूरत उपयुक्त क्षेत्र रेतीली मिट्टी वाले क्षेत्र बजरी/कंकड़ वाली संरचनाएँ 👉 सरल भाषा में कहें तो – छलनी ट्यूबवेल महँगा है, लेकिन साफ और लंबे समय तक पानी देता है। गुहा ट्यूबवेल सस्ता और जल्दी बनने वाला विकल्प है, लेकिन जल्दी भर सकता है। 🛠️ निर्माण प्रक्रिया उथले नलकूप बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है: 1. स्थान का चयन 2. बोरिंग (Drilling) 3. कॉयल स्ट्रेनर और फ्रेम का उपयोग 4. 5. लाइसनिंग (Casing) ⚙️ संचालन (Operation) 🌾 उपयोगिता ✅ फायदे ❌ सीमाएँ / नुकसान 🌍 क्षेत्रीय महत्व भारत के विभिन्न राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और पंजाब में उथले नलकूपों का उपयोग व्यापक है। 📊 आँकड़े (उदाहरण) 🌱 उथले नलकूप और किसानों की आजीविका 🚧 चुनौतियाँ 🏞️ समाधान और भविष्य की दिशा ✍️ निष्कर्ष उथले नलकूप भारत की ग्रामीण सिंचाई व्यवस्था का किफायती और सरल साधन हैं। ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए जीवनदायिनी भूमिका निभाते हैं। हालाँकि, इनकी कुछ सीमाएँ हैं – जैसे सीमित जल उत्पादन, मौसमी प्रभाव और प्रदूषण का खतरा। यदि इनका उपयोग सतत तरीके से किया जाए और जल संरक्षण उपायों को साथ में अपनाया जाए तो यह ग्रामीण भारत की खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उथले नलकूप योजना वास्तव में कई राज्यों में लघु सिंचाई विभाग द्वारा “निःशुल्क बोरिंग योजना” (Free Boring Yojana) के नाम से चलाई जाती है। 🌟 निःशुल्क बोरिंग योजना (Free Boring Scheme) उथले नलकूप केवल एक तकनीकी संरचना नहीं, बल्कि यह सरकारी सहयोग से जुड़ी योजना के रूप में भी किसानों तक पहुँचती है। इसे विभिन्न राज्यों में लघु सिंचाई विभाग (Minor Irrigation Department) द्वारा “निःशुल्क बोरिंग योजना” के नाम से संचालित किया जाता है। कृषक श्रेणी बोरिंग पर अनुदान (रू० प्रति बोरिंग) पम्पसेट पर अनुदान (रू० प्रति पम्पसेट) जल वितरण प्रणाली पर अनुदान (एच.डी.पी.ई. पाइप) कुल अधिकतम अनुमन्य अनुदान (रु० प्रति बोरिंग) सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली पर अनुदान (रू० प्रति हेक्टेयर) 1. सामान्य श्रेणी के लघु कृषक 11,000/- 18,000/- 4,800/- अधिकतम 14,900/- (01 हे. से अधिक 2 हे. तक) 2. सामान्य श्रेणी के सीमांत कृषक 15,400/- 25,200/- 4,800/- अधिकतम 20,380/- (01 हे. तक) 3. अनुसूचित जाति / जनजाति के कृषक 19,800/- 32,400/- 4,800/- अधिकतम 25,860/- 🏢 योजना का संचालन 👩‍🌾 योजना के लाभार्थी ✨ योजना की खास बातें: 👉 यानी कि उथला नलकूप केवल तकनीकी संरचना ही नहीं, बल्कि सरकारी योजना से जुड़ा हुआ hai 📑 आवेदन प्रक्रिया (सामान्य रूप से) 📊 प्रभाव

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बोरवेल (Borewell): जल आपूर्ति का आधुनिक साधन ✨ परिचय जल जीवन का आधार है। सभ्यता का आरंभ ही जल स्रोतों के आसपास हुआ था। आज भी पानी का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि और बढ़ गया है। जनसंख्या वृद्धि, शहरीकरण और कृषि विस्तार ने जल की मांग को पहले से कई गुना बढ़ा दिया है। भारत जैसे देश में, जहाँ वर्षा का वितरण असमान है और नदियों पर निर्भरता पर्याप्त नहीं है, वहाँ भूजल (Groundwater) एक प्रमुख जलस्रोत के रूप में उभरा है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में पेयजल और सिंचाई के लिए भूजल का सबसे सामान्य दोहन बोरवेल के माध्यम से किया जाता है। बोरवेल आधुनिक समय का वह साधन है जिसने ग्रामीण जीवन को बदल दिया, कृषि को गति दी और शहरों में जल संकट को कुछ हद तक दूर किया। लेकिन इसके अंधाधुंध उपयोग ने गंभीर जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन भी पैदा कर दिए हैं। इस ब्लॉग में हम बोरवेल की संरचना, महत्व, उपयोग, चुनौतियों और समाधान पर विस्तार से चर्चा करेंगे। ⚙️ बोरवेल की संरचना और निर्माण प्रक्रिया 1. ड्रिलिंग प्रक्रिया बोरवेल बनाने के लिए विशेष ड्रिलिंग मशीनों का उपयोग किया जाता है। यह ड्रिलिंग कठोर चट्टानों (Hard Rocks) में गहराई तक की जाती है। बोरवेल की गहराई स्थान विशेष पर भूजल स्तर (Water Table) के अनुसार तय की जाती है। 2. केसिंग पाइप (Casing Pipe) बोरवेल के धंसने (Collapse) का खतरा अधिक होता है। इसे रोकने के लिए बोरवेल में केसिंग पाइप लगाया जाता है। 3. जल प्रवेश क्षेत्र बोरवेल का निचला हिस्सा खुला छोड़ा जाता है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दरारों और चट्टानों के बीच मौजूद पानी आसानी से बोरवेल में प्रवेश कर सके। 4. पंपिंग सिस्टम बोरवेल से पानी निकालने के लिए सबमर्सिबल पंप, हैंडपंप या मोटर पंप का उपयोग किया जाता है। 📍 भारत में बोरवेल का महत्व 1. ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति भारत के लाखों गाँवों में पेयजल आपूर्ति का प्रमुख साधन बोरवेल ही है। 2. कृषि सिंचाई भारत की कृषि जल पर सबसे अधिक निर्भर है। मानसून पर आधारित खेती जोखिमपूर्ण होती है, इसलिए किसान बोरवेल का सहारा लेते हैं। 3. शहरी जल संकट का समाधान तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने शहरों में जल संकट खड़ा कर दिया है। 4. औद्योगिक उपयोग कई छोटे-बड़े उद्योग अपनी इकाईयों में पानी की आपूर्ति के लिए बोरवेल पर ही निर्भर हैं। ⚠️ बोरवेल से जुड़ी चुनौतियाँ 1. भूजल का अंधाधुंध दोहन भारत में प्रतिदिन लाखों लीटर भूजल केवल बोरवेल के जरिए खींचा जा रहा है। 2. सूखते बोरवेल जहाँ जलस्तर गिर गया है वहाँ बोरवेल सूख जाते हैं। 3. जल गुणवत्ता की समस्या गहरे बोरवेल का पानी कई बार दूषित होता है। 4. धंसाव और सुरक्षा जोखिम कई बार बोरवेल निर्माण अधूरा छोड़ दिया जाता है। 5. ऊर्जा की खपत बोरवेल से पानी खींचने के लिए बिजली या डीजल पंप का उपयोग होता है। 🌱 समाधान और सावधानियाँ 1. वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) बोरवेल को वर्षा जल संचयन प्रणाली से जोड़कर भूजल का पुनर्भरण किया जा सकता है। 2. बोरवेल का सुरक्षित रखरखाव 3. जल का विवेकपूर्ण उपयोग 4. जल गुणवत्ता परीक्षण नियमित रूप से बोरवेल के पानी की जाँच करानी चाहिए। 5. सरकारी नीतियाँ 🌍 सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव 📌 निष्कर्ष बोरवेल आज भारत में जल आपूर्ति का सबसे बड़ा साधन है। इसने लोगों को पानी की सुविधा दी है और कृषि उत्पादन को बढ़ाया है। लेकिन इसके अनियंत्रित उपयोग ने भूजल संकट को गहरा कर दिया है। हमें यह समझना होगा कि बोरवेल समाधान का साधन है, स्थायी समाधान नहीं। यदि हम भूजल का विवेकपूर्ण उपयोग नहीं करेंगे और वर्षा जल संचयन, पुनर्भरण एवं जल संरक्षण की दिशा में कदम नहीं उठाएँगे, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ेगा। इसलिए हमें सतत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए बोरवेल का उपयोग करना चाहिए ताकि यह हमारी ज़रूरत भी पूरी करे और पर्यावरण भी सुरक्षित रहे।

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How to Restart fail Boaring
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Borewell Water Quality: Testing and Treatment Tips

Borewell water is an essential source for many households, farms, and industries. While it often appears clean, underground water can contain contaminants that affect both health and equipment. Regular testing and proper treatment ensure that borewell water remains safe, clean, and reliable. 1. Why Borewell Water Testing is Important Even deep groundwater can be contaminated by natural minerals, industrial waste, agricultural runoff, or sewage seepage. Testing helps: 2. How Often Should You Test? 3. Key Tests to Conduct 4. Borewell Water Treatment Tips a) Filtration Systems b) Disinfection Methods c) Advanced Purification 5. Preventing Borewell Contamination

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Eco-Friendly Borewell Practices for a Sustainable Future

Borewells are a vital source of water for households, agriculture, and industries — but without proper care, they can quickly lead to groundwater depletion and ecological imbalance. Adopting eco-friendly borewell practices not only extends the life of your water source but also ensures that future generations have access to clean and sufficient groundwater. 1. Implement Rainwater Harvesting for Recharge One of the most effective ways to maintain a sustainable borewell is to recharge the aquifer. Install a rainwater harvesting system that channels rooftop or surface runoff into recharge pits connected to your borewell. This ensures the water table is replenished naturally. 2. Use Energy-Efficient Pumps Select pumps that are energy-efficient and properly sized for your needs. Oversized pumps waste both electricity and water, leading to unnecessary extraction. Solar-powered pumps are an excellent eco-friendly alternative. 3. Avoid Over-Extraction Set a limit on the daily water withdrawal from your borewell. Excessive pumping lowers the water table and can dry up nearby wells. Use water-saving fixtures and irrigation methods like drip irrigation to reduce consumption. 4. Conduct Regular Water Quality Testing Monitor the quality of your borewell water at least once a year. Eco-friendly management means ensuring your water is safe for consumption and not contaminated by chemicals, sewage, or other pollutants. 5. Create Recharge Zones If space allows, construct recharge wells, percolation tanks, or soak pits around your borewell. These structures help rainwater seep deep into the ground, recharging aquifers more effectively. 6. Community Awareness & Shared Responsibility Groundwater is a shared resource. Encourage neighbors and the community to adopt similar eco-friendly practices. When multiple borewell owners work together, the results are more impactful and long-lasting.

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How to Maintain Your Borewell for Long-Lasting Water Supply

A borewell is more than just a water source—it’s an investment in your home, farm, or business. Proper maintenance not only ensures uninterrupted water supply but also improves water quality and extends the life of your borewell. Neglect, on the other hand, can lead to reduced yield, contamination, and costly repairs. 1. Regular Borewell Inspection 2. Schedule Periodic Cleaning Over time, silt, sand, and biological growth can clog the borewell. 3. Water Quality Testing 4. Lubrication and Maintenance of Pump 5. Prevent Overuse 6. Recharge Your Borewell

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Borewell Basics: What You Need to Know Before Drilling

Drilling a borewell is a big decision—whether for a home, farm, or business. It’s not just about finding water; it’s about ensuring long-term, sustainable access to it. Before you start, here are the key things you should know to avoid costly mistakes and ensure success. 1. Understanding Borewells A borewell is a deep, narrow shaft drilled into the ground to access underground water. The depth, location, and method depend on the geological conditions of your area. 2. Conduct a Groundwater Survey 3. Know the Legal Requirements 4. Choosing the Right Drilling Method 5. Borewell Depth and Diameter 6. Selecting the Pump 7. Water Quality Testing Before using the borewell water, get it tested for: 8. Plan for Groundwater Recharge

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