पानी की प्यास और उम्मीद की किरण
गर्मियों के मौसम में बुंदेलखंड की दोपहर किसी अग्नि परीक्षा से कम नहीं होती। सूरज सिर पर अंगारे बरसा रहा होता है, मिट्टी से भाप उठती है और खेत बंजर पड़े दिखाई देते हैं। ऐसे ही एक तपते दिन, किसान रामलाल अपने खेत के किनारे खड़ा आसमान की ओर देख रहा था। उसकी आँखों में उम्मीद थी कि बादल आएँगे, बरसेंगे और उसकी फसलें बच जाएँगी। लेकिन यह उम्मीद अब सालों से अधूरी ही रह जाती है। गाँव में चारों तरफ नज़र डालो तो कई तालाब सूखे पड़े हैं, जिनमें कभी बच्चों की किलकारियाँ और मछलियों की छलक सुनाई देती थी। कुएँ और हैंडपंप प्यासे हैं। भूजल इतना नीचे चला गया है कि कूप खोदने पर भी पानी नहीं मिलता। रामलाल की यह कहानी सिर्फ एक किसान की नहीं है, बल्कि पूरे बुंदेलखंड की सच्चाई है। और यही वजह है कि आज लघु सिंचाई योजनाएँ और विशेषकर तालाब खुदाई व जीर्णोद्धार इस क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी पहल बन गई हैं। लघु सिंचाई: छोटी योजना, बड़ा असर भारत की पहचान एक कृषि प्रधान देश के रूप में रही है। यहाँ करोड़ों लोग खेती पर निर्भर हैं। खेती के लिए सबसे ज़रूरी है पानी। लेकिन जब बड़े बाँध या नहर हर खेत तक पानी नहीं पहुँचा पाते, तब काम आता है लघु सिंचाई (Minor Irrigation)। लघु सिंचाई का मतलब है – छोटे पैमाने पर बनाए गए जलस्रोत, जैसे: इनका फायदा यह है कि इन्हें गाँव के स्तर पर ही बनाया और संभाला जा सकता है। किसानों को पानी पास में ही मिल जाता है, और खेती के साथ-साथ पशुओं और घरेलू ज़रूरतों के लिए भी सहारा मिल जाता है। 👉 यही वजह है कि सरकार समय-समय पर लघु सिंचाई गणना (Minor Irrigation Census) कराती है, ताकि यह पता चल सके कि देश में कितने छोटे जलस्रोत हैं और उनकी स्थिति कैसी है। गणना की ज़रूरत – क्यों है अहम? कल्पना कीजिए – अगर डॉक्टर बिना जाँच किए दवा लिख दे तो क्या होगा? शायद बीमारी और बढ़ जाएगी।ठीक उसी तरह, अगर सरकार को यह ही न पता हो कि गाँवों में कितने तालाब हैं, कितने काम कर रहे हैं, कितने टूट चुके हैं, तो वह योजना कैसे बनाएगी? यही कारण है कि हर पाँच साल में लघु सिंचाई गणना की जाती है।इस गणना के ज़रिए: 7वीं लघु सिंचाई गणना – एक नया अध्याय अब तक की सभी गणनाएँ कागज़-कलम पर होती थीं। लेकिन 2023-24 की 7वीं लघु सिंचाई गणना पूरी तरह डिजिटल हो गई है। अब हर गणनाकर्मी मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल के ज़रिए डेटा दर्ज करता है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि समय भी बचता है। सबसे बड़ी बात – अब गलत या अपूर्ण डेटा की गुंजाइश बहुत कम रह गई है। बुंदेलखंड – जल संकट की धरती उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश के बीच फैला बुंदेलखंड क्षेत्र हमेशा से पानी की कमी झेलता आया है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति कुछ ऐसी है कि: कई गाँवों में तो हाल यह है कि लोग दिनभर एक-दो घड़े पानी के लिए भटकते हैं। गर्मियों में तालाब सूख जाते हैं और कुएँ प्यासे रह जाते हैं। लेकिन बुंदेलखंड की पहचान सिर्फ संकट से नहीं है। यह क्षेत्र अपनी जल-संरक्षण परंपरा के लिए भी जाना जाता है। यहाँ पुराने ज़माने में हर गाँव में तालाब और बावड़ियाँ हुआ करती थीं। लोग सामूहिक रूप से इन्हें बनाते और सँभालते थे। अब वही परंपरा लघु सिंचाई विभाग और सरकारी योजनाओं के ज़रिए फिर से ज़िंदा की जा रही है। तालाब का महत्व – गाँव की जीवन रेखा गाँव के बीचों-बीच बना तालाब सिर्फ पानी का गड्ढा नहीं होता। यह गाँव की जीवन रेखा होता है। तालाब भरते ही गाँव में खुशहाली लौट आती है। किसान की फसल बच जाती है, बच्चे तालाब किनारे खेलते हैं और पक्षी चहचहाते हैं। इसलिए जब लघु सिंचाई विभाग तालाब खुदाई और जीर्णोद्धार करता है, तो वह केवल पानी नहीं लाता, बल्कि पूरे गाँव में जीवन की लहरें वापस लाता है। छोटी सी कहानी – तालाब ने कैसे बदली ज़िंदगी Jhansi जिले के एक छोटे से गाँव में एक तालाब था जो बरसों से सूखा पड़ा था। किनारे टूट चुके थे, बीच में घास और झाड़ियाँ उग आई थीं। कोई उस पर ध्यान नहीं देता था। फिर गाँव पंचायत ने लघु सिंचाई विभाग की मदद से उसका जीर्णोद्धार कराया। JCB मशीनें आईं, तालाब गहरा और चौड़ा किया गया। बरसात आई तो तालाब भर गया। आज वही तालाब पूरे गाँव के लिए जीवन बन चुका है। गाँव के बुज़ुर्ग कहते हैं – “तालाब वापस आया तो गाँव भी फिर से जी उठा।” तालाब खुदाई की कहानी – एक सामूहिक प्रयास गाँव के लोग कहते हैं – “तालाब सिर्फ मिट्टी का गड्ढा नहीं, यह गाँव की पहचान है।”लेकिन समय और लापरवाही से कई तालाब सूख गए, उनमें मिट्टी भर गई और वे बेकार हो गए। यही वह पल था जब लघु सिंचाई विभाग और ग्राम पंचायतें एकजुट होकर तालाब खुदाई और जीर्णोद्धार की पहल करने लगीं। तालाब खुदाई एक कहानी की तरह है, जो कदम-दर-कदम आगे बढ़ती है: 1. स्थान का चयन – सही जगह पर तालाब सबसे पहले तय होता है कि तालाब कहाँ बनेगा। 👉 सही जगह पर तालाब बनाना आधी सफलता है। 2. योजना और डिज़ाइन तालाब की लंबाई, चौड़ाई और गहराई कैसी होगी – यह इंजीनियर और विशेषज्ञ मिलकर तय करते हैं। 3. खुदाई का काम यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है। कभी-कभी लोग कहते हैं कि तालाब खुदाई एक मेहनत भरा काम है, लेकिन जब पहली बरसात में पानी भरता है तो सारी मेहनत सफल लगती है। 4. किनारों की मजबूती खुदाई के बाद तालाब के किनारों को मजबूत करना ज़रूरी है। 5. पानी का उपयोग और रखरखाव तालाब भर जाने के बाद असली काम शुरू होता है। लेकिन अगर तालाब की सफाई और रखरखाव न हो तो वह फिर से बेकार हो सकता है। इसलिए ग्राम पंचायत की ज़िम्मेदारी है कि समय-समय पर इसकी सफाई और मरम्मत कराती रहे। तालाब खुदाई से होने वाले लाभ तालाब खुदाई का असर सिर्फ खेत तक सीमित नहीं रहता। यह पूरे गाँव की ज़िंदगी बदल देता है। 1. सिंचाई में सुधार बरसात खत्म होने के बाद भी किसान अपनी फसलों



